#Kahani by Mahesh Raja

Nari Hone Ka Arth

 

‘-“भैया जी ,ताजे मटर ले जाओ।सस्ते लगाये है।
रविवार का दिन।बाजार पहुंचा ही था कि यह आवाज सुनायी दी।
आजकल किसी भी प्रकार के कामकाज या दुकान मे स्त्री का होना सामान्य हो गया।पहले,ऐसा न था।स्त्री का घर से बाहर जाना निषेध था।
…… दस वर्ष पुरानी घटना याद आ गयी।
……यह उन दिनों की बात है ,जब बस्तर मे पोस्टिंग थी।बहुत सीधे सादे लोग थे।कार्य करने मे सरलता थी।
कुछ मित्र रायपुर से पधारे थे।दोपहर भोजनादि के पश्चात मुखवास की तलाश मे निकले।धर्मशाला के समीप ही पान की एक छोटी सी दुकान दिखी।एक सामान्य उमर की महिला बैठी पान बना रही थी।
सहज ढंग से कहा,-‘ बहन चार मसाला पान तो बनाना।”
इतना कहना था.उक्त महिला दुकान से नीचे आयी।सर पर आंचल लिया,और मेरे पैरों मे गिर पडी।
मैं हडबडा कर कह पडा,अरे.यह क्या बहन।
वह सामान्य हुई फिर बोली ,भाई साहब ,चार वर्ष हो गये इस दुकान पर।भाभी कहने वाले तो बहुत मिले।पर बहन कहने वाले आप पहले ईंसान है।मन भावुक हो गया.सो आपको प्रणाम किया है।”
मित्र गण सब चक्कित थे।वह पान बनाने लगी।तभी दो तीन शोहदे नुमा युवक पहुंचे।सिगरेट आदि खरीद कर एक ने कहा,भाभी तीन किमाम वाले पान लगाना।वे सब उतेजित होकर छात्र राजनीति की बाते कर रहे थे।उसमे से एक लगातार उस महिला को घूरे जा रहा था।वह सहज ढंग से सबको पान दे रही थी।
पान खाकर पैसे आदि देकर आफिस पहुंचे।एक स्टाफ ने बताया कि वह बडी भली महिला है,उसका पति शराब पीता है।कुछ काम नहीं करता।घर पर बूढी मां और दो बच्चे है।सबका पालन पोषन करने दुकान लगाती है.स्वाभिमानी है.कभी किसी से मदद नहीं लेती।मन मे उस नारी के प्रति सम्मान की भावना पैदा हुई।
बात आयी गयी हो गयी।पोस्टिंग भी रायपुर हो गयी।इस बीच खबर आयी थी कि नशे मे पति ने उसे मारा था और जलाने की कोशिश की थी।सुनकर दुःख हुआ था।
पुरूष प्रमुख समाज मे एक नारी के लिये सम्मान से जीना कितना कठिन है।मन मे क्षोभ भी हुआ।
पर राहत भी मिली की समाज मे परिवर्तन हुआ है।नारी का सम्मान बढा है।वह आज हर क्षेत्र मे अग्रणीय है।
अतीत से बडी मुश्किल से हटकर वर्तमान मे पहुंचा।उस दुकान से सब्जी भाजी लेकर घर लौटा।
*महेश राजा।वसंत 51,कालेज रोड महासमुंद।छत्तीसगढ़।

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