#Kahani by Mukesh Kumar Nihal

कहानी – एक था नास्तिक

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बात 2012 की है उस समय मैं इंटर में पढ़ता था । मैं कविता ,कहानी भी लिखता था । उस समय मैं धीरे-धीरे नास्तिकता की तरफ बढ़ने लगा भगवान से अजीब तरह की नफ़रत होने लगी । नफ़रत इतनी बढ़ गई कि मैं पुरी तरह नास्तिक हो गया । घर मे पूजा पाठ हो तो इसका विरोध करता कोई मंदिर जाता तो मुझे उस पर हंसी आती , भगवान का भी मजाक उड़ाने लगा । यहाँ तक की मैं अपना उपनाम भी नास्तिक रख लिया । तो अब मैं मुकेश नास्तिक के नाम से छपने लगा ।2015 तक खूब विरोध किया मेने। पर क्या पता था कि जो कर रहा था अधर्म है । 2016 के शुरुआत मे ही मेरा शरीर धीरे-धीरे पतला होता गया , कमजोर और कुरूप होता गया । अप्रेल महीना आते ही मैं अचानक काफी बीमार पड़ गया इतना कि लग रहा था मैं कुछ दिनों का मेहमान हूँ । एक साथ बहुत सी बिमारियों का शिकार । माँ  पापा को भी पंजाब से आना पड़ा । तुरंत मुझे आइ सी यु मे भर्ती कराया गया । कई दिनों तक सांस रुकने की वजह से मुझे कोई नहीं कह रहा था कि मैं बच पाऊगा । डाक्टर तरह-तरह के बिमारियों की जांच कर रहे थे पर पता ही नहीं चल रहा था कि मेरा शरीर अचानक काम    करना क्यो बंद कर दिया है । आखिर डाक्टर हार गए । इसके बाद महान ज्योतिष  से मेरी सब गलती बताई गई , कुण्डली दिखाई गई । मुझे पूजा करने और कुछ उपाय करने के लिए  किया गया । फिर क्या था हृदय परिवर्तन होने के बाद मेरी स्थति मे तुरंत सुधार हो गया। अब मुझे एहसास हो गया की मैं गलत था । भगवान है । मुझे अपना नाम भी बदलना पड़े । अब मैं पूर्ण रूप से आस्तिक हूँ  ।अब मैं मुकेश कुमार निहाल के नाम से जाना जाता हूँ। अब मैं साहित्य के क्षेत्र मे भी आगे बढ़ रहा हुँ ।

—— मुकेश कुमार निहाल

कटिहार , बिहार

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