#Kahani by Mukesh Kumar Rishi Verma

कौओं का संवाद 

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अरे आप और यहां हमसे मिलने आये हैं? ’

तो इसमें आश्चर्य की क्या बात है? कौआ कभी अपनी जात से अलग हो सकता है क्या, फिर चाहे वो किसी भी नस्ल, रूप – रंग का हो? ’

 

वो तो सही है’…

 

चलो काम की बात करते हैं | पूरी दुनिया जानती है कि तुम सबने दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला किया था और उसकी ढपली बजा – बजाकर आज हम पूरा भारत कब्जा चुके हैं, बस थोडा – सा बचा है और अब हमारे पास पैसे कम हैं | कर्जा भी बहुत हो गया है | अंड्डानी रोज – रोज मांग करता है | हमें विदेश घूमने भी जाना है, मंहगे – बहुत मंहगे कपड़े भी खरीदने हैं | मीडिया वालों का पैमेंट बकाया है | कोई विदेशी भी भीख नहीं दे रहा… बताओ क्या करें? ’

 

जी! जी!! इसमें हम क्या कर सकते हैं?’

 

मदद! हमारी आर्थिक मदद’…

 

पर… हमें क्या फायदा होगा?’

 

आपको को फायदा ही फायदा है, हम आपको पूरी तरह से दागमुक्त करवायेंगे | न्यायालय आपके माथे पर ठप्पा लगायेगा कि आपने कभी कोई घोटाला किया ही नहीं था, सब झूूंठ था और फिर बड़ी वाली मीडिया भी तो वही बोलेगी, जो हम कहेंगे और न्यायालय आजकल अपनी भाषा नहीं हमारी बाली बोलता है |’

 

कितना देना होगा… थोडा सा बचा है, बाकी तो स्विस वाले खातों में पड़ा है |’

 

ज्यादा नहीं बस घोटाले की ब्याज – ब्याज दे दो और कुछ स्विस वाले से हमारे वाले स्विस वाले में ट्रांसफ़र कर देना |’

 

सब मंजूर है पर जनता जाग जायेगी और आपका बनाबनाया करियर चौपट हो जायेगा |’

 

अरे उसकी चिंता आप मत करिये | इस देश की जनता तो बेवकूफ है | अगर बेवकूफ न होती तो सैकड़ों साल तक शख, हूण, मुगल, अंग्रेज न जाने कितनों के चाबुक भला क्यों खाती और अब हमारे खा रही हैहाहाहा… |’

 

बात तो सही है, पर इस देश की सेना को पता चल गया तो’…

 

उसकी भी चिंता आप मत करो, और फिर आप तो जानते ही हैं, नियम – कानूनों से बेचारी के नाक, कान, आंखें, हाथ, पैर सब बंधे हैं | जब हमें जरूरत होती है तब थोड़ा – सा खोल देते हैं, जब इस देश की जनता हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई चिल्लाते – चिल्लाते आपस में लड़-कट-मर जाती है और स्थानीय पुलिस से कुछ नहीं होता |’

 

यह सब भी ठीक है पर’…

 

अब ये पर क्या है?’

 

लेकिन हमें उन दो भेडियों से भी सचेत रहना चाहिए |’

 

ये भेडिया कौन हैं?’

 

चीन और पाकिस्तान!

 

अरे… ये हाहाहा… इनका ड़र दिखा – दिखा कर ही तो अपना उल्लू फिट हो रहा है |’

 

पर ये बहुत खूंखार हैं, किसी पर भी रहम नहीं करते’…

 

अरे तो इसमें ड़रने वाली क्या बात है, लंदन – पेरिस भाग जायेंगे | हमें क्या… हम बचने चाहिए बस’….

 

चलो फिर… डील पक्की आप अपना काम कीजिये | आपको अापका घोटाला मिल जायेगा, बहुत – बहुत शुक्रिया! घोटाला हमने किया और छुपाया आपने’…

 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा 

ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर

फतेहाबाद-आगरा, 283111

 

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