#Kahani by Naman Balla ( Naman Writer)

लघुकथा -: समय का बल्ब

“बडे भाई की पत्नी ने गेहूँ की बोरी पर हाथ पटकते हुए , अपने देवर के
बेटे को तीखे व्यंगबाणो से ले दौडाया ,
“तो भईया ! उनते कह दे जा के , कि मुंआँ हमारे का खजाने खुदे है , जो
दुखडा रोने यहाँ आते हो बार-बार !”
उ॰ प्रदेश मेँ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षामित्रो के समायोजन को
रद्द कर उनका मानदेय घटाने की प्रकिया अब शुरु ही होने वाली थी , और उन
सभी की चार माह से तनख्वाह भी नही प्राप्त हो पायी थी ।
ग्राम खमरिया के अबिनाश जो कि अपने ही ग्राम के एक प्राथमिक विद्यालय मेँ
शिक्षामित्र थे , अपने भविष्य को  बिगडता हुए देख काफी चिन्तित और बीमार
थे ,
” पिताजी , बडी अम्मा ने दवा के लिए पैसा देन से मना कर दिये है ” रुआसे
से स्वर मेँ बेटे ने आकर बीमार अबिनाश को जवाब दिया ।
अपने अधबने कमरे मेँ सामने की दीवार पर लगे जलते हुए बल्ब और उस बल्ब के
पास आती छिपकली को देख सोच रहा था , कि सच जीवन की खुशियाँ इस जलते हुए
बल्ब के समान है जब जीवन मेँ खुशियो का , आर्थिक सम्पदा का , बल्ब चमकता
है तब नाते रिश्तेदार भी छिपकली तथा कीडो की तरह पास आते दिखते है और वही
, जब यही “समय का बल्ब” बुझ जाता है तो सब दूर होकर धीरे-धीरे अपना हाथ
खीँचने लगते है ।”

-: नमन भल्ला
पता -: लखीमपुर-खीरी , उ॰प्र॰ , भारत
मो॰नं॰ -: 8400136769

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