#Kahani by Nisha Gupta

विश्वास

आशा अस्पताल में भगवान के मंदिर में बैठ कर निर्विकार सी मूर्ति को देख रही थी , मन ही मन ईश्वर से नाराज हो कर शिकायतों का पुलिंदा खोल दिया था ,आंसू झरने की तरह बह रहे थे ।

वो फफक पड़ी और बोली देखो प्रभु मेरी विधि को कुछ नही होना चाहिए । तुमने अरुण मुझसे छीने मैंने भाग्य समझ स्वीकार किया, मेरे बेटे राहुल को अपने पास बुलाया मैंने अपने बुरे कर्मो को ही दोष दिया, मगर अब अब नही आज मेरी आस्था मंझधार में है भगवन अगर वो डूब गई तो मैं जिंदा नही रहूंगी , अविरल बहते आंसू भगवान के पैर धो रहे थे । तभी दौड़ती हुई भानु आई और चिपट कर बोली माँ आप दादी बन गई, बिल्कुल मेरे भैया जैसी गुड़िया आई है माँ ,आपकी भगवान ने सुनली ।दौड़ती हुई आशा डॉक्टर के पास पहुंची डॉक्टर बोली ऐसा चमत्कार अपने जीवन काल में पहली बार देखा है । आशा जी माँ और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं, बधाई आपका विश्वास और आपकी  सच्ची आस्था जीत गई । सच जहां दवा काम नही आती आपकी दुआ जरूर कामयाब होती हैं ।

निशा गुप्ता

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