#Kahani by Nisha Gupta

जी लूं जरा

 

जी लो जरा

 

आज फिर कोहरा बहुत है कुछ समझ नही आ रहा रोहन को ट्यूशन भेजूं इतनी सुबह या नही

अनमनी सी मोनिका समझ नही पा रही है बिस्तर पर करवट बदलते हुए अचानक उसे एक झटका लगा और वो  उठ गई अरे नही भेजना तो पड़ेगा ही उसका आज टेस्ट है उसीसे ही तो पता चलेगा कम्पीटिशन के लिए कितनी मेहनत कर रहा है रोहन ।

 

ये ही सब सोचते सोचेते मोनिका ने रोहन को गर्म दूध का गिलास पकड़ाते हुए उठाया और जल्दी तैयार होने को बोल खुद छोड़ के आने का फैसला लेते हुए तैयार होने लगी ।

 

रोहन चलो बेटा माँ मैं बाइक से चला जाऊंगा आप क्यो इतनी सुबह ठंड में परेशां होती हो

 

नही कोई बात नही मैं ही  छोड़ आती हूँ कह कर मोनिका ने गाडी निकाली ।

 

गाड़ी रिवर्स करते हुए अक्सर सोच भी रिवर्स होती है मोनिका को अपना गुजरा जमाना याद आ रहा था इतनी चिंता तो न थी हमे और हमारे माता पिता को कुछ बनने की चाह और लगन तो हमे भी थी और हमारे समय से ही लोग सभी विधाओं में जा रहे है फिर ये अचानक क्या हो रहा है हमारे समाज को सोचते सोचते राहुल का इंस्टीटूट आ गया  और मोनिका ने जैसे ही गाड़ी रोकी राहुल गाड़ी से उतरा

 

अचानक जैसे सारा ब्रह्मांड घूम गया एक साथ जोरदार आवाज के साथ गाड़ियों के आपस में टकराने और चीख पुकार से मोनिका को एक पल समझ नही आया कि क्या हुआ

 

किसी के झकझोड़ने पर् मोनिका ने देखा राहुल जोर जोर से माँ माँ चिल्ला रहा है ।मोनिका होश में आई इधर उधर देखा पूरे हाईवे पर अजीब सी स्तिथि से उसे भान हुआ कि कुछ अनहोनी हो गई है खुद को संभाल गाड़ी से उतरी सामने बच्चों को देख उसकी रूह कांप गई खुद को संयत कर घटना स्थल पर पहुच घायल बच्चों को अपनी गाड़ी में बैठा कर पास के हॉस्पिटल में भागी बच्चों को एडमिट करवा एम्बुलेन्स पुलिस सब को खबर की पूरे रास्ते एम्बुलेंस और पुलिस का सायरन उसको चेतन रखे हुए था वो फिर घटना स्थल पर पहुंच घायलों की मदद करती रही । अंतः उसने फैसला किया किअब इस दबाव में न खुद जियेगी न अपने बच्चे को जीने देगी और राहुल को वापस गाड़ी में बैठा उसने कहा अब और नही तुम अपना जीवन इस दबाव से बाहर आकर जीओ राहुल ये रोज रोज का तुम्हे कोहरे में भेज कर भगवान से बार बार प्रार्थना कर मैं नही जी सकती

 

तुम्हे खुद ही घर पर स्वयं से अपने लिए रास्ते गढ़ने होंगे आज की घटना ने मुझे बता दिया है कि कहीं न कहीं हम भी जिम्मेदार है इन घटनाओं के क्यो हम तुम्हे दबाव में डालते है क्यो ट्यूशन चाहिए हम भी बिना ट्यूशन के पढ़े है और काम कर रहे है । राहुल अब तुम अपना रास्ता विवेक से चुनो ।

 

आज ही सब परेण्ट्स की मीटिंग कॉल करके इस समस्या का समाधान ढूंढती हूँ ।

 

एक ही सांस में इतना कुछ कहकर मोनिका ने नजर ऊपर उठाई तो रोहित को अपनी और आश्वाशन भऱी नजरो से देखते पाया और एक गहरी सांस ले मोनिका ने गाड़ी स्टार्ट कर घर की और मोड़ दी ।चेहरे पर एक संतुष्टि झलक रही थी उसके

 

आज अपनी आंखों के सामने हुए मंजर को भूल पाना संभव नही जिन के घर केचिराग इस घटना ने बुझा दिए थे वो फिर कभी रोशन न होंगे पर मोनिका अपने निर्णय पर खुश थी

 

निशागुप्ता –  देहरादून

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