#Kahani By Ramkrishan Gupta Naveen

“बेवजह”

आज फिर उसी चारपाई पर बैठे हुए बाबूजी ने पूछा .लड़की वालों का कई बार फ़ोन आया . बताओ क्या विचार है . उस लड़की के बारे में .सुंदर है , पढ़ी लिखी है , परिवार भी संस्कारी है , और मैंने भी उनको हाँ कह दिया है . बेटा अब मना मत करना मैंने ज़बान दे दिया है .

. मैं कुछ बोल पाता तब तक अम्मा बोलने लगी . अरे कब तक यू कुँवारा बैठा रहेगा . पच्चीस लड़की देख चुका है . जब बूढ़ा हो जायेगा तब शादी करेगा क्या . अब तेरी एक भी नहीं सुनूँगी . बहुत हो गया तेरा नाटक अम्मा ने गुस्साते हुए बहुत बोला.

मैंने भी सोच लिया .आज मैं अपनी बात अम्माँ बाबू से बता कर ही रहूँगा . और अपने पुराने प्यार के बारे में सब सच सच बता दूँगा .
रात भर मैं सो नहीं पाया सिर्फ़ इस बात को सोचता रहा . की मैंने इतने दिन तक इस बात को क्यों छुपा कर रखा . अम्माँ बाबू को बहुत परेशान किया . मैंने कई बार झूँठ बोला . लेकिन अब मैं सत्य बोलूँगा .
दूसरे दिन शुबह ही मैंने अम्माँ को सारी बात बता दी . इसी बीच बाबू जी भी आ गए . और उन्होंने सारी बात सुन भी लिया
फिर गुस्साते हुए बोले ,
गधे के बच्चे जब तुमने लड़की कहीं देख ही लिया था तो एक बार बोल भी दिया होता . मैं पचीस लोगों को परेशान तो नहीं करता . अब मैं उन बेटियों से किस तरह से क्षमा माँगू .

जिनको पढ़ाई की वजह से मना किया
जिनको रंग की वजह से मना किया
जिनको लम्बाई की वजह से मना किया
जिनको सूरत की वजह से मना किया
जिनको संस्कार की वजह से मना किया
आख़िर जिनको बेवजह ही मना किया
यह बोल कर बाबूजी रोने लगे …………
बेवजह ……………..
कवि लेखक
रामकृष्ण गुप्ता “नवीन”

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