#Kahani By Reeta Jaihind Hathrasi

दुल्हन का श्रंगार
घर बिजलियों की रंगबिरंगी रोशनियों से जगमग – जगमग कर रहा था ।दरवाजे फूलों और बंदनवार से सजे हुए थे …मंदिर में ठाकुर जी अपनी राधारानी  के साथ मंद – मंद बांसुरी की धुन से वातावरण सुवावित कर रहे थे …एक तरफ घर में मधुर संगीत  की ध्वनि से हम आपके हैं कौन  वाली फिल्म के गाने से सबको आनंदित कर रहे थे दुल्हन का श्रंगार  अच्छी ब्यूटीशियन से होने की वजह से और भी उसके चेहरे पर चार चाँद लगा रहा था ….. रिशतेदारों और सगे संबंधियों की रौनक से चहलपहल कर रहा था बारात के आने का इंतजार सभी कर रहे थे तभी दूर से शहनाई की धुन सुनाई दी और बच्चे दौड़कर बारात आगई बारात आ गई का शोर करते हुए द्वार की तरफ जाने लगे बारातियों का भव्य स्वागत और  दूल्कुहे व दुल्छहान द्वारा जयमाला की रस्म तथा अन्य रस्मो के बाद विवाह संपन्न हुआ ……. दुल्हन  का श्रंगार इतना सुंदर प्रतीत हो रहा था मानो कोई दूल्हा अपनी दुल्हन को चाँद के पार से लेने आया हो…. बढ़िया तथा आजकल की अच्छी आधुनिकता एवं दुल्हन के पिता जी द्वारा दहेज में केवल “सवा रूपया ” …ही स्वीकार कर बाकी राशि  ..”दुल्हन ही दहेज दहेज है “कहकर सभी को चकित कर दिया
बदलते भारत की तस्वीर स्पष्ट रूप से नजर आ रही थी ।”अच्छे दिन ” आ गये हैं …….ऐसा प्रतीत हो रहा था ।”सवच्छ भारत ” हरेक कहे रहा था ….. माता  – पिता का आशीर्वाद पाकर दूल्हा और दुल्हन सभी बाराती रवाना हो चुके थे।और पीछे रखे डी जे पर हल्की – हल्की धुन में ” बाबुल की दुआऐं लेती जा ” के बाद  “साड्डा चिड़ियाँ दा चंबा वे ” मद्धम आवाज में बज रहा था ।
  – रीता जयहिंद हाथरसी ( दिल्ली )
mob no . 8368851064 , 9717281210

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