#Kahani by Rifat Shaheen

लघुकथा

सवाल

क्या चाहिये मुझे तुमसे? तुम्हारी ज़िन्दगी के वो पल जो बच रहे हैं सबको देकर। या वो जज़्बात जिसकी बारिश में भीग चुके है कई बदन,वो सांसे जो टकरा चुकी है किसी और सांसों से,वो खुशबु जो बिखर चुकी है कई रेशमी आँचल पर,वो सेज जिस पर पड़ी है न जाने कितनी सिलवटें। मुझे तो ये बासी पन भी कुबूल है फिर क्यों ख़ामोश हो तुम? क्या चाहिए मुझे तुमसे?

 

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