#Kahani by Shabdh Masiha

मैं पागल नहीं होना चाहता

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 डाक्टर साहब ! जरा इनको देखिये आप . जाने क्या हो गया है इन्हें ….सपने में भी भारत माता की जय …इन्कलाब जिंदाबाद चिल्लाते रहते हैं .पत्नी ने कहा .

 डाक्टर ने उसकी आँखों को देखा और दूसरे अंगों का मुआयना किया और फिर बोला-

 क्या आप के घर में पहले कोई स्वतंत्रता सेनानी था या किसी के साथ कोई और घटना घटी थी जिसका इनके मन पर गहरा प्रभाव पड़ा हो ?’

 नहीं , डाक्टर साहब ऐसा तो मुझे ज्ञात नहीं है . मुझसे शादी के बाद इन्हें घर से निकाल दिया था पहले मैं नारी निकेतन में रहती थी और घर वालों को ये रिश्ता मंजूर नहीं था .

 कोई और बात जिसे देखकर इन्हें बुरा लगता हो ?’

 ये जब भी अखबार पढ़ते या टी वी देखते तो बार-बार भावुक हो उठते थे और कहते थे कि देश गलत रास्ते पर जा रहा है . जनता अंधी हो गयी है …लोग स्वार्थी हो गए हैं और बार-बार अपने पैन को बन्दूक की तरह पकड़कर टी वी पर बच्चों की तरह गोलियां दागते थे ….और कुछ नहीं.

 आप शराफत , देशभक्ति और जागरूकता को क्या छोटी बीमारी समझती हैं ? इसका इलाज तो अब संभव नहीं है ….माफ़ कीजिये बहिन जी …और हाँ , फीस वापिस लेते जाइयेगा …मैं पागल नहीं होना चाहता .

 शब्द मसीहा

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