#Kahani by Surendra Kumar Arora

ससुराल

 

 

हाँ मम्मी , जल्दी से बताओ ! घर आने वाला है .” चलती कार में फोन की घंटी फिर से बज उठी .

एक बात रह गयी थी पर कोई बात नहीं , गाड़ी चलाते समय वैसे भी लम्बी बात नहीं करनी चाहिए . कल बता दूंगीं .”

नहीं – नहीं मम्मी , फोन किया है तो बता ही दो , मैं गाड़ी साइड में लगा देती हूँ .

बेटा ! वैसे ही इतनी देर हो चुकी है . तुम्हारी सासु माँ क्या कहेंगीं कि आफिस से आने में इतनी देर कहाँ हो गयी !”

जाने दो न मम्मी . उनको देखूँगी तो हो चूका . अवल तो पूछेंगी नहीं फिर भी कुछ कहा तो कह दूंगीं कि ट्रैफिक जाम था “

फिर भी बिटिया तुम्हे तो पता ही है कि लगभग रोज छुट्टी के दो घंटे बाद घर पहुंच रही हो . सुबह की तो मजबूरी है क्योंकि तुम्हे नौ बजे घर से निकलना होता है पर वे बुजुर्ग हैं बिटिया और सुबह के साथ – साथ रात के चूल्हे – चौके की भी सारी जिम्मेदारी उन्हीं के जिम्मे छोड़ना ठीक नहीं है .”

मम्मी , क्या इसीलिए दुबारा फोन किया है . अगर ये बात है तो मैं फोन रखती हूँ और घर पहुंच कर आपकी समधन का चौका संभाल लेती हूँ . दिन भर आफिस में कम्प्यूटर में सर फोड़ो और रात को चूल्हे में अंगुलियां जलाओ . इसीलिए आपने मुझे कम्प्यूटर इंजीनियर बनाया है ? “

सॉरी बिटिया , तू तो नाराज हो गयी . मैं भी कभी – कभी बावली हो जाती हूँ . मैं तो ये कह रही थी कि तू मेरी बिटिया नहीं , मेरे लिए ईश्वर की ओर से दिया हुआ सबसे बड़ा तोहफा है . तेरे कारण मैं गर्व फील करती हूँ . ”

मैं जानती हूँ माँ . तुम्हारा बस चलता तो तुम मेरी शादी ही न करती . हमेशा अपने पास ही रखती .”

बिट्टो ! अपने पास रखने की सोचती तो मेरी जान को , आदित्य जी के रूप में एक नगीना कैसे मिलता ? “

बस – बस माँ , इतने भी अच्छे नहीं है कि तुम उन्हें अमूल्य घोषित कर दो . “

इतनी जल्दी भूल गयी .तू ही तो कहती थी कि या मेरी शादी आदित्य से कर दो नहीं तो मेरी शादी का सपना देखना भूल जाओ . मेरे पास आदित्य है तो मैं हूँ नहीं तो मैं कुछ भी नहीं .”

हाँ – हाँ याद है न माँ पर तुम जो भूल गयी थी वह बताओ . “

बिट्टो ! कल आफिस के बाद आदित्य जी के साथ कुछ देर के लिए आ जाओ . “

मम्मी ! अभी परसों ही तो आये थे ? फिर से इतनी जल्दी ? “

बिट्टो , घर है तेरा . मन नहीं लगा इसलिए कह दिया . नहीं आना चाहती तो न सही , जो तुझे ठीक लगे .”

ठीक है , देखती हुँ माँ ! “

देखती हुँ मतलब ? “

मतलब – वतलब कुछ नहीं . आदित्य से कहूंगी तो मम्मी जी को तो वे सेट कर लेंगे पर उस घर में वो जो पापा नाम के जीव हैं न , वे जरूर नाक – भौं सिकोड़ेंगे . ”

बिटिया मन में आया , सो कह दिया ! “

ठीक है . करती हुँ कुछ . अब फोन रखती हुँ . आदित्य भी घर पहुंचते होंगें . भूख भी लग रही है मम्मी .”

उसने कार स्टार्ट की और घर की ओर चल पड़ीं .

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