#Kahani by V K Anjan

बजुर्गों का दर्द

हमारे हाथों जो बड़ा पला है
वोही अब हमें समझाने चला है

लगने लगे हैं बोझ हम उसको
जब से उम्र का सूरज ढला है

बोया था जिसे बुढापे के लिए
जहरीला हो के वो पेड़ फला है

रखता है जैसे वो रहना पड़ता है
वरना बाहर का रास्ता खुला है

घर घर की है यह कहानी ‘ अनजान ‘
बस चुप रहने में ही भला है!!

-वी.के.’अनजान’
-श्रीगंगानगर(राजस्थान)

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