#Kahani by Vidhya Shankar Vidhyarthi

 

लघुकथा

 

गिद्ध उत्सव

 

मौत टली किन्तु चालक और

 

खलासी को झटका देती टली |

 

लेकिन उन्हें काफी जख्म दे

 

डाली थी | चालक और खलासी

 

काफी बहुत ही भयभीत थे

 

क्योंकि उनके पास से उन्हें

 

सुघती मौत जो गुजरी थी |

 

शायद मौत इसलिए छोड़ गयी

 

थी कि तुम दोनों दुर्घटना में लोगों

 

के अमानवीय व्यवहार की

 

नजारा देखो –

 

ट्रक सड़क के ठीक बीचो बीच

 

पलटी थी जिससे सभी गाड़ियों

 

का परिचालन बाधित था | घटना

 

स्थल पर विलंब से ही किन्तु

 

पुलिस आ चुकी थी | अब

 

क्षतिग्रस्त गाड़ी को खीचने के

 

लिए किरान गाड़ी की आने की

 

प्रतीक्षा थी |

 

विलंब में कुछ लोगों को अपने

 

अपने गन्तव्य स्थल तक पहुंचने

 

की काफी बेचैनी बढ़ रही थी,

 

जो स्वाभाविक थी | कुछ लोग

 

वैसे कुछ लोग की हरकत से

 

चकित थे कि ईश्वर इस संसार में

 

विविध प्रकार के जीवों का जन्म

 

दिया है, जिसमें पक्षी प्रजाति के

 

एक मांसाहारी पक्षी गिद्ध भी

 

आते हैं | आज यहाँ तो ऐसे

 

लोगों की अमानवीय हरकत यही

 

संकेत दे रही है कि मानव में भी

 

कुछ गिद्ध प्रजाति के लोग हैं,

 

जिन्हें किसी के दुख सुख से कुछ

 

लेना देना नहीं | संवेदना उनकी

 

मरी होती है | दिल होता है

 

लेकिन पत्थर का |श्मशान में

 

मांस नोच कर गिद्ध उत्सव मनाते

 

हैं किन्तु आज ये लोग सड़क पर

 

सेव की पेट्टियाँ तोड़ कर

 

हर्षोल्लास मना रहे हैं | जख्मी

 

चालक और खलासी के मांस

 

खाये या सेव क्या फर्क पड़ता है

 

|फर्क ही क्या है वैसे गिद्ध और

 

मानव प्रजाति के एेसे गिद्ध में |

 

कितना वीभत्स दृश्य है यह, उन्हें

 

नहीं तो हमें लज्जा आती है,

 

जख्मी आदमी पर आदमी का

 

गिद्ध उत्सव देख | जिन्हें दर्द नहीं

 

तो हया भी नहीं |

 

चालक और खलासी अपनी

 

अपनी अाँखें पोछते हैं और

 

थूकते हैं – – थू… |

 

विद्या शंकर विद्यार्थी

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