#Kahani by Vinod Sagar

ज़वाब (लघुकथा)

झुरही नगर पंचायत के कार्यपालक कुमार गौरव अनैतिक कार्यों के पक्ष में न थे, इसलिए वे किसी भी बिल को बिना जाँच-पड़ताल किये, उसपर अपना हस्ताक्षर नहीं करते थे जिससे नगर अध्यक्ष नरेश पासवान, उपाध्यक्ष खिजलुद्दीन आलम, अधिकांश वार्ड पार्षद व कुछ नगर पंचायत-कर्मियों की ऊपरी कमाई पर जैसे पानी फिर गया था। इन्हीं कारकों के मद्देनज़र नगर पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नगर पंचायत के अन्य वार्ड पार्षदों ने मिलकर कार्यपालक महोदय के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने का फ़ैसला किया। वे जिले के उपायुक्त के पास जाकर कार्यपालक की शिक़ायत की कि कार्यपालक महोदय नगर पंचायत के विकास में बाधा पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं। अतः उनपर उचित कार्रवाई की जाये या फिर उनका तबादला किया जाये, ताकि विकास-कार्य हो सके। इन सबके अतिरिक्त उनलोगों ने नगर पंचायत की जनता के बीच में भी ये अपवाह फैला दिये कि आवास आवंटन में कार्यपालक को कमीशन चाहिए, इसलिए नगर पंचायत के अंदर किसी भी प्रकार का कार्य नहीं हो रहा। इतना कुछ करने के बाद सारे-के-सारे ख़ुश थे कि अब कार्यपालक महोदय क्या ज़वाब देंगे…और जब ज़वाब ही नहीं देंगे तो फिर अपनी बोरिया-बिस्तर समेटकर नगर से नौ-दो-ग्यारह हो जायेंगे और फिर सबकी मनमानी की दुकान दौड़ पड़ेगी।

आज सात दिन बाद टाउन हॉल में कार्यपालक महोदय ने नगर पंचायत की जनता की उपस्थिति में आमसभा करवा रहे थे, जिसमें जिसका-जिसका आवास नहीं था, उसे ख़ुद से वहीं पर कर्मचारियों द्वारा फॉर्म भरवा रहे थे और लाभुक से एग्रीमेंट करवाने के साथ ही उनके खाते में आवास योजना के तहत प्रथम क़िस्त भी डलवाते जा रहे थे, साथ ही वे सभी लाभुक को हिदायत भी देते जा रहे थे कि कोई भी लाभुक किसी भी बिचौलिये या दलाल के चक्कर में न पड़ें। अगर किसी को कोई दिक़्क़त हो, तो वे मेरे कार्यालय या फिर मेरे आवास पर भी मिल सकते हैं। अपने दाँव उल्टा पड़ता देख नगर पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व वार्ड पार्षदों के दिमाग़ ठिकाने लग चुके थे या यूँ कहें कि उन्हें उनके सवाल का उचित ज़वाब मिल चुका था…तभी तो सभी के मुँह कुत्ते के दुम-से लटके हुए थे।

-विनोद सागर, जपला।

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