# Kahani by Vishal Narayan

— ” सरस्वती पूजा “–

 

जल्दी-जल्दी चलिए न, सरस्वती पूजा के लिए कोई सामान छुट न जाए. इस बार बिट्टू के मैट्रिक की परीक्षा है. धूमधाम से करेंगे सरस्वती पूजा. वर्मा जी को लगभग भीड़ भरे बाजार में घसीटते हुए लिए जा रही थीं मिसेज वर्मा.

 

वर्मा जी कुछ सुनकर थोड़ा ठिठक गये. केवड़े ले लो न सर. सरस्वती जी खुश रहती हैं, केवड़े उन्हें पसंद भी हैं.

 

पर वर्मा जी तो कुछ याद करने में लगे थे. अरे तुम तो…

 

हाँ सर, मैं मोनु, चहकते हुए कहा था उस पन्द्रह वर्षीय बालक ने. आपके विद्यालय का छात्र सर.

 

हाँ, पर तुम तो अच्छा पढ़ते थे. फिर यहाँ, क्यूँ… उलझते हुए पुछा था वर्मा जी ने.

 

हाँ सर, मैं पढता तो अच्छा ही था पर मेरे पास प्रैक्टिकल के लिए दिया जानेवाला एक्सट्रा पैसा न था. मुझे केमिस्ट्री प्रैक्टिकल में फेल कर दिया गया सर. उसकी सारी चहक एक झटके में खामोशी में डूब गयी. खैर छोड़िये न सर, आप केवड़ा ले लीजिए. इस साल पैसे जुटाकर मैं पास हो जाउँगा.

 

वर्मा जी को आगे घसीट लिया था मिसेज वर्मा ने. पर वर्मा जी तो एक साल पीछे चले गये थे. जिन बच्चों ने प्रैक्टिकल के नाम पर माँगे गये एक्सट्रा पैसै न दिए थे उनको फेल करने का निर्णय वर्मा जी का ही था. बाकी सारे विभागों ने नंबर कम दिए थे पर वर्मा जी के रसायन विभाग ने फेल कर दिया था. वर्मा जी के दिमाग का रसायन गोल – गोल चक्कर मारने लगा था. जब पैसों से ही किसी का भविष्य बनाया बिगाडा जा सकता है तो फिर सरस्वती पूजा की आवश्यकता ही क्या है.

✍–” विशाल नारायण “

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