#Kahani by Vishal Narayan

-” प्यार की बाजी “–

 

वैलेन्टाईन वीक का आखिरी दिन, यानि कि वैलेन्टाईन डे था. मैं घुमते घुमते बाजार में निकल गया था. यूँ तो मुझे किसी को गुलाब देना नहीं था पर यायावर मन गुलाब के गुच्छों पर रूक गया था. मैं गाड़ी किनारे खड़ी कर के  देखने लगा था. सब अपने अपने हिसाब से गुलाब खरीद रहे थे. कोई फूल चाहता था तो किसी को कली पसंद थी. कोई एक ले रहा था कोई पूरा का पूरा गुलदस्ता ले रहा था. कुछ छुपाकर, शर्माकर लेते तो कई शान से खरीदता. इन खरीददारों में ज्यादातर स्कूल कॉलेज के बच्चे या फिर नयी पीढ़ी के युवा थे. हाँ एक दो लोग और भी थे जिनके चेहरे पर झुर्रियाँ लटक रही थीं पर ये भी हो सकता है कि मन अभी भी जवान हो.

 

दिन भर लाल होकर तपने के बाद सूरज भी गुलाबी होकर ढ़लने लगा था. क्षितिज पर गुलाबी गुलाल दूर दूर तक फैल गया था और मैं गुलाबों को और नजदीक से देखने के चक्कर में बाजार में  अंदर तक चला आया था. किसी की टोकरी में दो तो किसी की टोकरी में चार गुलाब शेष थे. खरीदने वाले अभी भी आ जा रहे थे. मैं भी आगे बढ़ता जा रहा था. एक बच्चे की टोकरी में एक ही गुलाब शेष था. मैंने सोचा इसे मैं खरीद लूँगा तो ये बच्चा अपने घर चला जाएगा.

 

यूँ तो मुझे किसी को गुलाब देना न था पर मदद की भावना से ऐसा करने की सोची मैंने. पूछ लिया. कितने का दिया. उसका जवाब था बेचने का नहीं सेठ. मेरा माथा ठनक गया. अपने अहं पर आ गया था मैं. एक गुलाब 10-20 का आता होगा. मैंने कहा 50 ले लो. धन का पासा फेंका मैंने. वो राजी हो गया. कहा कोई नहीं, मैं दूसरा ले लुँगा.

 

मेरा माथा और ठनका ये बच्चा गुलाब क्या करेगा. मैंने पच्चास का नोट बढ़ाते हुए पूछा तू क्या करेगा, गुलाब. उसने कड़कती आवाज में कहा. आई को देगा. मेरे चेहरे पर हँसी तैर गयी. कोई माँ को गुलाब देता है क्या, वो भी वैलेंटाईन पर. उसने संयत होकर जवाब दिया. मैं ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं सेठ, पर इतना जानता है कि भेलेनटाईन पर प्यार करने वालों को फूल देते हैं और मेरी आई से ज्यादा मुझे न तो कोई प्यार करता है और ना ही कर पाएगा. इसलिए आई को गुलाब देगा मैं.

 

मेरी हँसी बंद हो गयी थी. गुलाब को उसी की टोकरी में छोड़ मेरे पाँव अपने आप रास्ते की ओर मुड़ गये थे. हम पढ़े लिखे होने का अँग्रेजीदाँ ठनक, माथे में लिए फिर रहे थे और एक बिना पढ़ा लिखा बच्चा दिल की बात बोलकर, प्यार की सारी बाजी जीत गया था.

✍– ” विशाल नारायण ”

 

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