#Kahani by Vishwa Vijay Pratap

I WAS THE KILLER

 

चारो तरफ घना कुहरा छाया रहता है…… अगर किसी को देखना पडे तो सिर्फ हल्का-हल्का सा चेहरा दिखाई पडेगा वो भी ये नही पहचाना जा सकता है कि किसका चेहरा है। वहा का जगह पथरीली, चारो तरफ ऊचे-2 पहाड….टूटी-फूटी बस्ती जिसमें लोग रहते है। थोडी दूर पर आवाजे सुनाई पडती है।

“ मारो……..मारो…….मारो……..मारो………..”

आवाजो को सुनकर सारे बस्ती वाले अपने-2 घरो से बाहर आ जाते है ……।

दूर सामने से पाच-पाच आदमी एक आदमी को पकड कर ले आते है जो सिर से लेकर पाव तक जंजीरो में जकडा गया रहता है। पीछे से हजारो आदमी चिल्लाते रहते है….।

“ मारो…….मारो………मारो………..।“

सारे आदमी उस आदमी को लेकर जाते रहते है और मारो….मारो चिल्लाते रहते है….। सारे गॉव वाले अपने-2 घरो से देखते रहते है। जैसे ही वे लोग उस आदमी को लेकर आगे बढते है……..। एक बुढ्ढा व्यक्ति धीरे से कहता है।

“ किलर  “

वो सारे आदमी किलर को लेकर आगे चले जाते है और साथ में…..मारो…..मारो…..चिल्लाते रहते है…। बुढ्ढा फिर अपने आप से बोलता है ….।

“नही……ये नही हो सकता…….।“

…….. ये नही हो सकता ……..जिसकी पूजा करनी चाहिए …..लोग उसे मारने के लिए नारे लगा रहे है।……..नही ये नही हो सकता।

ये बाते कहते-2 बुढ्ढा तेजी से बोलता है।

“ये……… नही हो सकता”

बुढ्ढे की आवाज सुनकर समस्त ग्राम वासी बुढ्ढे के करीब आ जाते है…….ग्रामवासियो में से एक लडकी बुढ्ढे से पूछती है …।

‘क्या हुआ बाबा……..’

बुढ्ढा फिर वही बात दोहराता है

“नही ये नही हो सकता”

‘बाबा …….क्या नही हो सकता ……….बोलो ……..कौन थे ये लोग…..बोलो बाबा……….’

बुढ्ढा सभी को ध्यान से देखता है …..और कुछ क्षण के लिये एकदम शांत हो जाता है …..।  फिर कुछ देर बाद लडकी कहती है …।

‘बाबा …बताओ तो सही …..क्या नही हो सकता।‘

बाबा सारी कहानी समस्त ग्राम वासियो के समक्ष प्रस्तुत करता है।

“ ये कहानी बहुत समय पहले की है ……..यहा बहुत समय पहले महाराज सूर्यभान का राज चलता था………….बहुत मन्नतों के बाद राजा सूर्यभान के राजमहल में एक राजकुमार का जन्म हुआ….पर ये किसे पता था कि ……वो राजकुमार एक दिन इसी राजमहल के लिए शाप बन जायेगा ।

‘फिर’

“फिर क्या…..राजा सूर्यभान को ये सारी बातें नही पता थी कि जो कुछ राजमहल में हो रहा है ……वो सब ….उनके बेटे राजकुमार की है ….चूँकि राजा सूर्यभान अपने पुत्र के प्यार में इनता ज्यादा खो गय़े थे….. कि उन्हें राजमहल की तनिक भी फिकर नही होती थी…..।

दिन बीतता गया …….राजा एक दिन जंगल मे शिकार को गये ………उनके साथ राजकुमारी भी थी………। जब राजा शिकार से वापस लौट रहे थे तो उन्हें रास्ते में एक नन्हा सा बालक रोता मिला….। महारानी बहुत ही दयालु थी……उन्होनें महाराज से बच्चे को राजमहल में ले आने की अनुमति मांगी…। महाराज ने महारानी के दयालु भावना को देखकर अनुमति दे दी…..और उसनन्हें बालक को राजमहल में ले आया……अब राजा सूर्यभान के पास दो औलाद हो चुकी थी…….राजा को ये लगा अब सब कुछ ठीक होगा……..पर अब तो सब कुछ पहले ती अपेक्षा और बिगड चुका था।“

‘फिर बाबा’

“फिर क्या था…समय बीतता गया ……….पूरे इलाके में घोर सूखा पडा सभी प्रजावाशी भूख से तडप-2 कर मरने लगे………।

एक दिन राजमहल मे एक सफेद पोशाक वाला व्यक्ति आया…..जो अपने को हिमालय पर्वत का ,साधु बताया……….

“…………राजमहल को सही सलामत रखने के लिए …….दोनों राजकुमार को कठिन परीक्षा से गुजरना पडेगा ……..महारानी तो उस साधु की बात सुनकर घबरा गयी……पर महाराज सूर्यभान अपने दिल पर पत्थर रखकर साधु से बोले……….”

‘कैसी कठिन परीक्षा स्वामी जी ………आप आदेश करें……….राजमहल को बचाने के लिए हम कुछ भी करने के लिए तैयार है।‘

“महाराज हम ये आदेश तभी दे सकते है ….जब हम ये जान लेगें कि दोनों राजकुमार कठिन परीक्षा देने योग्य हो चुके है या नही……इसके लिए ……..आप कल की सभा …….राजमहल के बाहर वाले स्थान पर करिये ……….हम प्रातः पुनः उस सभा मे उपस्थित होंगें….।“

‘जी स्वामी’

ये कहते हुए साधु वहॉ से चला जाता है। महाराज अगले दिन की सभा राजमहल के सामने वाले स्थान पर करते है ……जिसमें समस्त प्रजावासी शामिल रहते है।

समस्त सभा में साधु का पुनः आगमन होता है …….सभी साधु को खडे होकर नमन करते है।

दोनों राजकुमार भी सभा में उपस्थित रहते है।

महाराज सूर्यभान स्वामी के समक्ष दोनों राजकुमारों को प्रस्तुत करते है। साधु दोनों राजकुमार के सामने कडी चुनौती भरी कार्य सौपता है……..जिसमे से बडा राजकुमार तो कार्य को पूरा कर लेता है……परन्तु छोटा राजकुमार कार्य पूरा करने में कुछ गलतियां कर देता है। ….साधु महाराज से निवेदन करते है।

“महाराज कठिन कार्य को पूरा करने में आपके बडे राजकुमार सकुशल कामयाब निकले परन्तु छोटे राजकुमार इस कार्य को सही तरीके से पूरा नही कर सके ……..महाराज मै आपके सम्मुख ये रहस्यमयी पुस्तक सौपता हूँ…..इस पुस्तक में सारा रहस्य छिपा है……….किस तरीके से आप अपने राजमहल को बचा सकते है…….परन्तु मैं आपको सचेत करना चाहूंगा कि ……..छोटे राजकुमार को इस रहस्यमयी किताब और रहस्यमयी कार्यों से दूर रखें ……अन्यथा छोटे राजकुमार की जान को खतरा हो सकता है।“

साधु ये बात कह कर चला जाता है।

महाराज पुस्तक में लिखी बातों को पढकर काफी ज्यादा चिन्तित हो जाते है ……उन्हें ये नही समझ आता है कि अपने बडे राजकुमार को कैसे अकेले कार्य को सौपा जाये…….वो इस बात से भी ज्यादा परेशान थे कि …..अगर इस कार्य के लिए छोटे राजकुमार को भेजा जाए तो उसके जान का खतरा है।

सब कुछ सोचने के बाद महाराज अपने बडे राजकुमार को कार्य सौप देते है……….छोटा राजकुमार भी कार्य में हाथ बटाने की जिद करता है……और महाराज छोटे राजकुमार की बात टाल नही पाते है और छोटे राजकुमार को भी कार्य सौप देते है।

दोनों राजकुमार रहस्य़मयी किताब की सहायता से उस जगह पर पहुच जाते है…….

ये बात बताते-2 बुढ्ढा चुप हो जाता है…….लडकी पूछती है ……

‘फिर क्या हुआ बाबा…..’

“फिर क्या था…….ब़डा राजकुमार वह़ॉ भी वही सारी गलतियां करने लगा जो राजमहल मे किया करता था………परन्तु छोटा राजकुमार बडे राजकुमार के द्वारा की गई सारी गलतियों को सुधारने मे लगा रहता है। बडे और छोटे राजकुमारो का ये कार्य काफी दिनों तक चलता रहा……और एक दिन ऐसा आया कि सारी जनता बडे राजकुमार को मारने के लिए खोजने लगी……..चूकि बडा राजकुमारक इतनी सारी गलतिया कर चुका था…….”

‘फिर बाबा’

“फिर छोटे राजकुमार को ये पता चला कि अब बडे राजकुमार का बच पाना मुश्किल है…..तो उसने बडे राजकुमार को सुरक्षित जगह पहुचाकर अपने आप को बडे राजकुमार के पोशाक में आकर समस्त ग्रामावासियों के सामने आ गया।

समस्त ग्रामवासी उसे जंजीरो में जकड कर आज उसी जगह पर ले जा रहे है………जहा पर लोगो को बडी बेरहमी से मारा जाता है।……हम ,सब लोगों को छोटे राजकुमार की सहायता करनी चाहिए।

‘वो क्यों बाबा’

राजकुमार का हम सब पर बहुत ज्यादा एहसान है……आज जैसे भी हम सब यहा है…..वो सब छोटे राजकुमार दया है. …..हम सबको वो जगह छुपानी होगी जहॉ ये सब छोटे राजकुमार को ले जा रहे है।

‘वो कैसै’

“सब लोग चलो मेरे साथ”

समस्त ग्रामवासी बुढ्ढे के साथ जाते है थोडी देर बाद खूब ज्यादा कुहरा छा जाता है जिससे सबका चेहरा पहचान में नही आता है…….वो सारे सैनिक किलर को लेकर उस स्थान पर पहुच जाते है जहा उसकी बलि देनी रहती है…….सब उसे खम्भे से बाध देते है……और मारो…..मारो का नारा लगाते है।

सैनिको का सरदार सबको चुप रहने को कहता है………सारे सैनिक चुप हो जाते है……

‘अब ……इस किलर की बलि दी जायेगी ……आप सब सहमत हो……’

आवाज चारों तरफ गूंज जाती है।

“हाँ…..हाँ……”

तब तक अचानक खम्भे के पीछे से निकल कर बडा राजकुमार छोटे राजकुमार की हत्या कर देता है ।

बडा राजकुमार पहले से ही वही छुपा रहता है।

समस्त सैनिक तथा समस्त ग्रामवासी ये सब देखकर आश्चर्य हो जाते है …..।

छोटा राजकुमार ……..ब़डे राजकुमार की तरफ देखता है ……और अपना हाथ आगे बढाकर कहता है ….

“ भइया  “

और जमीन पर गिर जाता है और मर जाता है

 

 

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