#Kaivta by Kirti Tiwari

ये ख्वाबो का खुला आसमान…

मगर यथार्थ की जमीं पर कदम टिकाए रहते हैं;

हौसलों की परवाजो के साथ,उठते चले जाते हैं

ऊपर और ऊपर;

वास्तविकता से परे

बुन लेते है ख्वाब,

और उन्हें पूरा करने की अनन्त कोशिशे

पर मेहनत तो रंग लाती ही है ना!!!

और एक दिन सूरज भी निकलता है

नई उम्मीदो का;

और लिखे जाते है,अफ़साने

उस अथक प्रयास के;

निराशा के दलदल से निकल

बून लेते हैं नया कल

मगर फिर भी;

यथार्थ की जमी पर कदम टिकाये रहते हैं …

#कीर्ति

Leave a Reply

Your email address will not be published.