#Kavi9ta by Shambhu Nath

भवरे मंडराते अब फूलो पर ॥
हवा बहे स्वछन्द ॥
कलियां महक विखेर रही है ॥
मौसम आया बसंत ॥
चिड़िया कलरव शुरू किया है
कोयल गीत सुनाती ॥
मोर मतवाला होके नाचे ॥
ऋतू बसंती भाती ॥
रंग विरंगे रंगे है उपवन ॥
छाया है  आनंद ॥
कलियां महक विखेर रही है ॥
मौसम आया बसंत ॥
लौकिक छटा निहारे अम्बर ॥
धरती माँ मुस्काती ॥
मधुर मिलन होने वाला ॥
खड़ी शोभा सकुचाती ॥
सूर्य किरण विखराता अपनी ॥
चंचल करती चंद्र ॥
कलियां महक विखेर रही है ॥
मौसम आया बसंत ॥
शम्भू नाथ कैलाशी
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