#Kavita by Aasee Yusufpuri

भजले भजले हरि का नाम –2

धर्म वही है वेद वही है

वही है तीरथ धाम………..।

 

शक्ति वही विश्वास वही है

जीवन मरण की आस वही है

धरती वही आकाश वही है

दूर भी है और पास वही है

धूप वही है छाँव वही है

वही है सुब्हो शाम

भजले भजले हरि का नाम –2

 

नभ थल में जीवन्त वही है

आदि वही और अंत वही है

कण कण में है रूप उसी का

पीर पयम्बर सन्त वही है

चक्र वही और चाल वही है

वो ही है मृत्युविराम

भजले भजले हरि का नाम –2

 

दुःख की छाया निकट खड़ी है

माया की यह विकट घडी है

कैसे आसी उसको पुकारे

छोटा मुंह और बात बड़ी है

देव वही महादेव वही है

कृष्ण कहीं कहीं राम

भजले भजले हरि का नाम –2

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सरफ़राज़ अहमद आसी

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