#Kavita by Abhishek Shukla

तुम न समझे

 

मेरी वकत इस दुनिया मे किसी ने न समझी,

बुरा तो तब लगा जब आपने भी न समझी।

उम्मीद न की कभी किसी से कोई तारीफें करे,

पर इल्तजा रही सबसे कि कोई दुखी भी न करे।

फिर भी मान लिया कि बिल्कुल अच्छे नही है हम,

पर दिन रात ख्वाबों मे आपके खोये रहे है हम।

गम ये नही कि तुम मुझसे बेफिक्र अपनो मे रहते हो,

दर्द होता है बहुत जब सबके आगे मुझे न समझते हो।

सब सह लेता हूँ हँसकर क्योंकि तुमसे प्यार करता हूँ,

तुम आओ या न आओ पर हर पल इन्तजार करता हूँ।

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