Kavita by Abhishek Shukla

तेज धूप

 

गर्मी में तेज धूप से सब बेहाल हो रहे है,

जरूरी काम को सुबह-शाम का इंतजार कर रहे है।

गर्मी से बचने के सब उपाय ढूंढ रहे हैं,

सब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रयोग कर रहे है।

ए. सी,फ्रिज और ऑटोमोबाइल का खूब प्रयोग हो रहा है,

“ग्लोबल वार्मिंग” इनका बड़ा योगदान हो रहा है।

मई- जून में तापमान 40 के पार हो रहा है,

सभी का गर्मी में बुरा हाल हो रहा है।

हमें न पर अपनी गलतियों का एहसास हो रहा है,

हमारे कारण ही हमारा जीना दुश्वार हो रहा है।

हम कब सुधरेंगे अब किस बात का इंतजार हो रहा है,

लगाओगे पेड़ पौधे जब इस धरा पर।

तब देखना हरियाली और छाँव से मन हर्षित बारम्बार हो रहा है।।

 

-अभिषेक शुक्ला

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