#Kavita by Acharya Amit

“वो हंसते है मेरे ग़म पर

इंसाफ नही करते

मुस्कुराते है मेरी आहों पर

मुझे मुआफ़ नही करते..”

 

भूली हुई यादों सा

दर्द बसता है सीने में

भूली हुई यादों सा

दर्द बसता है सीने में

अब खाक़ मज़ा नही है

यारों इस जीने में….

भूली हुई यादों सा

दर्द बसता है सीने में….

 

सावन का महीना है

और पलछिन तुम्हारे है

सावन का महीना है

और पलछिन तुम्हारे है

कुछ राहत तो यूं होती

तुम आ जाते इस महीने में…

भूली हुई यादों सा

दर्द बसता है सीने में….

आचार्य अमित

 

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