#Kavita by Acharya Amit

तुम बहुत इश्तेहार लगाते हो

हर गली-मोहल्ले

नुक्कड़-चौराहों पर

आज हमने भी

तुम्हारा एक इश्तेहार पढ़ा है

किसी की खूबसूरत आंखों में

काश!यह इश्तेहार आम हो जाये

और तू भी कसम से

कुछ बदनाम हो जाये

तब पता चलेगा तुझे संगदिल

चर्चा-ए-आम क्या होता है

कैसा लगता है जब कोई

किसी की मुहब्बत में

बदनाम होता है

माना होता है थोड़ा नाम

मग़र यह नाम उसके लबों पर हो

जिसके लिए बदनाम हुए

तो मर जाना भी गवारा कर ले

लेकिन जब उसके मुहल्ले में

एक उसके सिवा सभी

तेरे दीदार-ए-यार के

दीदार को अपने घरोंदों से

अब बाहर आ निकले

तू भी निकल आता तो

क्या सूरत होती

ज़िन्दगी थोड़ी देर के लिए

मेरी भी खूबसूरत होती….

आचार्य अमित

 

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