#Kavita by Acharya Amit

तेरा ऐतबार मेरे ऐतबार से बेहतर होगा

शायद तेरा घर अंधेरो से दूर

रोशनी का सरमाया होगा

खुशबू सा महक उठता होगा

तेरी मुस्कुराहट से सहनेचमन

हर फूल तेरी ख़ुशी में

ज़िभर के मुस्कुराया होगा

जिसका ख़्याल कभी तेरे

ज़िक्र से उभरता रहता है

उसका ख़्याल कभी ख़यालों में

तुझे भी आया होगा

नही टूटा है तू अभी

टुकड़ों में कांच सा बनकर

या फिर तुझे उस खुदा ने

संगदिल ही बनाया होगा

तेरी मुस्कान पर खिल जाती है

यूं कलियां मानो

सुबह का सूरज उम्मीद बन

उनके लिए निकल आया होगा

तुझे खुद से प्यार है तो रहे

मेरा दिल भी तेरे प्यार के लिए

तुझ पर आया होगा

जो महसूस करता है कह देता है दिल

शायद इसी बात का लुत्फ़

तूने किसी रोज़ उठाया होगा

मेरे नग्मों की तू प्रेरणा है मेरे दिलवर

शायद कोई नज़्म का टुकड़ा कभी

तूने मेरे लिए भी गाया होगा….

आज नही तो कल पिघलेगा मोम सा

यही कहकर बारबा मैंने

अपने दिल को बहलाया होगा

आचार्य अमित

One thought on “#Kavita by Acharya Amit

  • May 25, 2018 at 8:21 am
    Permalink

    वाह!!—-बहुत बढिया।।

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