#Kavita by Acharya Amit

हर उम्मीद एक मुअम्मा है

जब तक हौसलों की

चासनी से लबरेज़ न हो

बात कितनी भी सशक्त हो

तब तक बेबाक़ ही है

जब तक नरम लहज़े से

उसमें पशोपेश न हो….

आईना है दिल या

दिल का आईना है ज़िन्दगी

कल कोई कह रहा था

एक इशारा है ज़िन्दगी

मुद्दतों से इश्क़ आवारा

घूम रहा है सुकून-ए-दिल की तलाश में

कोई रहबर लेकर आया

उसको तेरे पास में

तू अगर हुस्न है

तो सज़दा करता है इश्क़ तुझे

तू अगर वो बुत है जो

संग लिए है साथ में

संगदिल कभी होना नही तू

चाहे जो भी हो इधर

तू बशर था !

तू बशर है!

और हमेशा रहेगा….

तू बशर!……

आचार्य अमित

Leave a Reply

Your email address will not be published.