#Kavita by Acharya Amit

न मैं गिरता हुँ
न तुम संभलते हो
साथ नही कभी रहे
फिर भी साथ का दम भरते हो
उन्माद है एक हवा सा
यह दिलों से दिलों का रिश्ता
बारिश की फुहार सा
झर-झर तुम बरसते हो
ठंडी-ठंडी हवाएं
बह रही है देखो कैसी
मीठी सी हल्की-हल्की
मुस्कान यह तुम्हारी
देखों गुलों को हँसकर
जिनमें खुशबू सा तुम
बिखरते हो….
आचार्य अमित

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