#Kavita by Acharya Amit

आओं धुंधली सी उस
दीवार पर एक नज़र डालें
जिसको यादोँ के दरीचों में
दफनाएं हुए ज़माना हो गया
दिल की गहराई से फिर
साफ़ करें उसकी हर धूल को
हर जाले को ख़ास कर
दिल के किसी कोने में
महफूज़ उस जाले को
जिसने अब तक हमें
उससे दूर किये रखा….
फिर इश्क़ की अटखेलियों की
बनाये उस पर नक़्क़ाशीयाँ
और उन नक़्क़ाशीयो पर
इतनी शिद्दत से दुआ पढें
नमाज़ों की तज़वी करें…
उन पर तुम्हारा अक्स उभर आये…
और वो अक्स भी हमसे कुछ यूं
इश्क़ फरमाएं जैसे….
किसी रहगुज़र का
भटका हुआ मुसाफ़िर
मंज़िल को पा गया हो
किसी प्यासे समंदर को
उसकी प्यास मिल गई हो
और किसी अंधेरें गुलिस्तां को
सुबह की पहली किरण सी
एक आस मिल गई हो….
हर आम को यह लगने लगे
हाँ उसे भी अब कोई वाज़िब वज़ह
कुछ ख़ास मिल गई हो….
आचार्य अमित

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