#Kavita by Acharya Amit

पुरुष प्रधान समाज की

मानसिकता तो देखो

अपनी खोखली मर्दानगी

का मर्दन करने अलावा

इनके पास कोई मुद्दा ही

नही है हिजड़ों और

वैश्याओं को भी इन्होंने

आज मात दे दी

बहन बेटी और माताओं से

जन्मे यह कुलवृक्ष आज अपने

ही वंशवृक्ष को बकासुर बन

खाने को उतारू है

मैं सम्मान करता हूँ हर उस

व्यक्ति का जिसने अपनी आत्मा नही

बेची अपना ज़मीर नही बेचा

और धिक्कारता हुँ ऐसे हवस के

वहशी दरिंदो की मर्दानगी को

जो महिलाओं के साहस को उन्मुक्त

एहसास वरदान के रूप में

देने के बजाय उनको बाज़ारू बनाने पर

उतारू है सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने के लिए

मन की बात कहकर

मन की आँतड़ियों को भी

खींचकर निकालने में लोग शाश्वत माहिर है

इन्होंने अपने लहुँ के क़तरो में भी

राक्षसी ज़ज़्बातों को जगह दे रखी है

इन्हें भोली भाली जनता से सबको भस्म

कर देने का अतुलनीय वरदान प्राप्त हो चुका है

अब यह उस भस्मासुर की प्रजाति के नही है

जिसकी एक भूल ने उसको ही भस्म कर दिया था

यहां को कृष्ण भी तो नही है जो मोहिनी बनकर

इनका मोह भंग कर दे यह तो भेड़िये है जो

अपने ईष्ट को भी अपने नफ़े-नुकसान के

चलते कोड़ियों के भाव फट्टे से लगा दे….

आपकी आपसी समझ और एक दूसरे पर

विश्वास ही आपको इन सबसे बचा सकती है..

बस यही सोच रखता हूँ आपके और अपने लिए भी…”हम होंगे कामयाब एक दिन”….

आचार्य अमित

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