#Kavita by Acharya Amit

देश को परदेश में
ढूंढना बन्द करो
जिस तरह ईश्वर
कहीं बाहर नही है
उसी तरह देश भी
तुममें ही समाहित है
और तुम देश में…..
ठीक उसी तरह
जैसे ईश्वर और तुम
एक-दूसरे में
समाहित हो….
बस यही खोज
अन्यत्र और अनन्त
तक हमें भटकाव
पर ले जाती है….
अब भटकना छोड़ो
और स्वयं को
समझो जानो
और पहचानों
यही पहचान तुम्हें
स्वयं तक ले जाएगी……
आचार्य अमित

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