#Kavita by Acharya Amit

किस तरह सौंप दूं
सौंप दूं तुझको
अपनी सभी वेदनाएं
वो वेदनाओं का तिलिस्म
जबकि तेरी ही रहनुमाई की परछाई है
समर्पित मेरा अन्तःकरण
गूंथ रहा है मेरे सपने
वो सपने जिनमें हरसू
तेरी ही खुशबू मैंने
भीनी-भीनी सौंधी-सौंधी पाई है
सौंप दूं तुझको मैं।अपने
उन पलछिनों को
जो तेरे वज़ूद से होकर
मेरे वज़ूद का निमित्त बने है
किस तरह सौंप दूं तुझको
तेरी ही संवेदनशील
उपहारों की श्रखंला को…..
आचार्य अमित

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