#Kavita by Acharya Amit

“भूल गये”
“करते रहे श्रृंगार साथी,
तन का-
आत्मा को भूल गये।
भौतिकता की दौड़ में साथी,
चलते-चलते-
आध्यात्म को भूल गये।
आत्म सुख में डूबे इतना साथी,
जग में-
परपीड़ा भूल गये।
स्वार्थ सिद्धि को भजते रहे,
प्रभु नाम-
साथी परमार्थ भूल गये।
आधुनिकता की चाहत में साथी,
दौड़ते रहे-
सेवा-संयम भूल गये।
नित गये सत्संग साथी,
सुने प्रवचन-
सद्कर्म भूल गये।
मैं-ही-मैं में बीता जीवन,
हम की भाषा-
साथी भूल गये।
करते रहे श्रृंगार साथी,
तन का-
आत्मा को भूल गये।।”
ःःःःःःःःःःःःःःःःः
सुनील कुमार गुप्ता

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