#Kavita By Acharya Amit

तेरे इश्क़ के ख़ुमार में
हम फ़ना यूँ हुए
बुझे हुए दीप
मानो जल हो उठे
तेरे ख़्याल से
दिल हमख्याल यूँ हुए
मानो शरद ऋतु
शिशिर की और चले
कुछ शरारत है
तेरी आँखों की
कुछ सादगी है
तेरी बातों की
यही शरारतों के सिलसिले
सादगी से शुरू हुए
बड़े बुसुक से
दिल ने उन पर
ऐतबार पाया है
क्या पता उनको
अपनी ख़बर मिले
या न मिले…

आचार्य अमित

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