#Kavita By Acharya Amit

होली मिलन…..

आओ मिलकर होली खेले
आओ मिलकर होली खेले
रंग जाए सब एक दूजे में
जैसे खुशबू फूल में
रंग जाती है
जैसे भँवरों की गुंजन में
वो खुशबू लिप्त हो जाती है
जैसे उस खुशबू के रंग में
पूरा गुलशन महक उठता है
आओ हम भी उसी
प्रीत की महक के रंग से
रंग जाए एक-दूजे में
जो भूखा है उसे
पकवान निवाला खिलाये
जो राह भटका है उसे
राह दिखाए
जो गूंगा है मूक है
उसे शब्दों की भाषा दे
जो स्वार्थ में अंधा है
उसे सही राह दिखाए
जो आस्वादन ले रहे है
काग़ज़ी टुकड़ो का
उनको रिश्तों की अहमियत समझाए
जो ज़िस्म नोंचने वाले
भूखे भेड़िये है
नरभक्षी है
पिशाच है
उन्हें सत्य का बोध कराएं
उन्हें रूहानी पैकर के
रूहानी मायने समझाए
रंगों का त्यौहार है होली
बेरोजगारों की श्मशान है होली
इस महंगाई में कहां है होली
अमीरों के घर की शान है होली
गरीबों के लिए
एक तूफान है होली
रंग बनाये या रंग से
खुद को बहलाये
जात-भाषा में जकड़े रहे या
इस रंग को हाथ मे पकड़े रहे
आख़िर यह भी तो रंग है
वो रंग जो सब जगह है
सबमें शामिल है
फिर क्यों हम
इस रंग को भुलाकर
नफ़रत बेकारी धर्म हिंसा
छूत-अछूत के रंग में
लिपटे हुए है
हमें यह अन्तरंगी लिबास को
उतारकर फैंकना होगा
और प्यार प्रेम त्याग और
ममता के रंग से
इस त्यौहार को सींचना होगा
हम इस बार
किसी मज़हब का नही
किसी पार्टी का नही
किसी जाति का नही
किसी धर्म आदि का नही
बल्कि इस बार हम सब मिलकर
प्रेम के रंग झंडा उठाते है
और एक दूसरे पर
प्रेमसुधा रंग बरसाते है
आओ मिलकर हम
यह अहद उठाते है
इस बार दिमाग़ी रंगों से नही
दिल के रंगों से
यह होली रंगीन बनाते है….
और मिलजुलकर घर घर
यह प्रेम होली का
सन्देश पहुंचाते हैं….
आचार्य अमित

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