#Kavita By Acharya Amit

उसने अपना बनाकर
मेरी कीमत बढा दी
यह अलग बात है
हर दिल की ख़्वाहिश
उसका ख़्वाब है
वो मासूम है या
हसीन है या
फिर यह कहूँ
हर शै उससे मुत्मइन है
उसकी मौजूदगी अक़्सर
एक कशिश सी जगाती है
यह कहना गलत नही
मेरी तिश्नगी को बढ़ाती है
मेरे वज़ूद में अक्स
उसका ही मिलेगा
वो भले ही कीचड़ का कमल हो
मग़र मन्दिर में
देवी के चरणों पर ही चढ़ेगा
उसका पाकसाफ होना
इसी बात की नुमाइश है
हर शख़्स की मुसीबत
उसकी उल्फ़त की आज़माइश है……
आचार्य अमित

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