#Kavita by Acharya Amit

ये बारिश की बूंदे

उम्मीदों का है पानी

इनके बरसने को

तरसती जवानी

है यौवन की मस्ती

इनकी अदा में

घटाओं में शामिल है

इनकी कहानी

ये बारिश की बूंदे

उम्मीदों का है पानी…

तन्हा लोग इन बूंदों की

अगन से है जलते

कितने परिंदे है

जो इनको तड़पते

दिल की परिंदे की भी

यही है कहानी

ये बारिश की बूंदे

उम्मीदों का है पानी

बचपन का दर्पण भी

इनमे समाया

वो भी याद आया

जो न लौट पाया

सभी भूले-बिसरों की

यही है कहानी

ये बारिश की बूंदे

उम्मीदों का है पानी

अपना – पराया ये किसकी सगी है

सभी दिलजलों की कुछ इससे ठगी है

मानो न मानो ये सताती बहुत है

आंखों से मोती गिरती बहुत है

हर नम आंख की है

बस ये कहानी

ये बारिश की बूंदे

उम्मीदों का है पानी…

आचार्य अमित

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