#Kavita by Acharya Amit

शब्दों को निर्मोही और

मूक कर दिया

उसके तेवर ऐसे थे

दिल प्रीत से भर गया

शिद्दत और सादगी

दोनों दिल मे

उतर रही थी

कोई पलक न ऐसी थी

जिसमें न वो मंज़र ठहर गया।

आचार्य अमित

One thought on “#Kavita by Acharya Amit

  • November 23, 2017 at 11:43 am
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    Very beautiful poem
    Nice net of words

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