#Kavita by Acharya Amit

लग रहा है

फिर बदल गया कोई

आप मौसम ही

जाने

वो वो जाने

जो हमने कहा

अभी

बदलने की फ़िराक़ में

ही रहा शायद!

तभी तो बदल गया

झट से

फटाफट

बिना बात के

दही कर गया

दिमाग की

और सही भी

कर गया

दिमाग को

जो आरज़ू हमारी थी

वो अब उसकी भी

न रही

और जो सपने उससे थे

वो अब हमारे भी

न रहे

तो क्या हुआ

हम भी वही

रह गए

जो मिलने से

पहले थे उसके

और वो भी वही

हो गया

जो पहले से था।

आचार्य अमित

 

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