#Kavita by Acharya Amit

एक याद है मुहब्बत की

तेरा ज़िक्र तेरी फ़िक़्र

एक पास है दिल का

तेरी इनायत तेरी सोहबत

मिल्कियत है मेरी

तमाम ज़िन्दगी की

तेरा इश्क़ और मेरा दर्द

काश! मेरी आह! का असर

एक दिन तुझे भी

दिल मे समाने पर

आतुर हो आये

कह नही सकता मग़र

समझ सकता हुँ

दिल की बात है

दिल तक पहुंचा ज़रूर सकता हुँ….

आचार्य अमित

 

55 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.