#Kavita by Acharya Amit

तेरे इश्क़ का ख़ुमार

मुझे कर रहा है बेक़रार

अदाकारी वक़्त की दे रही है

तेरी हर ख़ता का ज़वाब

इतरा रहा है मन

ख़्वाबों में खो जाने को

आवाज़ दे रहा है कोई

ख़ामोशी में दबे पांव

चली आती है तेरी याद

मैं बैचेन सा रहता हुँ

तेरी एक झलक पाने को

तरस जाता है दिल

तेरी एक झलक पाने को

मुस्कुरा जाता है हरसू

मेरे दिल का आंगन

तुझे पाने की आरज़ू में

ज़िंदगी तरन्नुम कर रही है

मेरी बदहवास उमंगों में।

आचार्य अमित

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