#Kavita by Acharya Amit

लब छू रहे अब

लबों के एहसास को

दिल सुन रहा है

अब धड़कने दिल की

मेरा ख़ामोश रहबर

शायर आवाज़ दे रहा है

मदहोश कर रही है

अब मुझे इश्क़ की बानगी

किराये का है कमरा

मेरा दिल हो चाहे तेरा

कोई नही जानता कब

किसका इसमें होगा बसेरा

आंखों को तलाश है

जिस चैनोसुखन की

काश!तेरी ज़ुल्फ़ों के साये में

वो तलाश ख़त्म हो जाये

सुर्ख होठों के यह तबस्सुम

मेरे होठों तक भी आये….

आचार्य अमित

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