#Kavita by Acharya Amit

हम हार भी जाते

दिल अपना हुनर अपना

काश! तेरी चाहत में

ज़र्रा भी असर होता

उल्फ़त ने सिखाया है

यूँ संगदिल बन जाना

वरना ये मुसाफ़िर हरपल

सफ़र में रहता…

अब ठहर गया हुँ तो

कुछ कर जाएगी अदा अपनी

या तो याद बनकर

रुलायेगी तुझे या फिर

ख़्वाब बनकर तड़पायेगी मुझे….

आचार्य अमित

 

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