#Kavita by Acharya Amit

बिना किसी वज़ह के

तलाशना खुद को खुदी में,

ये बुतपरस्ती नहीं

तो और क्या है,

माना मना है

इस तरह किसी को

इतनी बेपनाह मुहब्बत करना,

पर क्या करे हम

खुद का जो इश्क़ के सजदे में

खुद ब खुद झुक जाती नज़र है।।                   आचार्य अमित।

 

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