#Kavita by Acharya Amit

आधी रात बीत चुकी है

बाकी भी बीत ही जाएगी

इस घनघोर अंधेरे के पार

फिर एक नई सुबह आएगी

सितारों का यह झुरमुट

सूर्य की किरणों की रोशनी में

धूमिल होने लगेगा कुछ इस क़दर

यह रंगत पलभर में बदल जाएगी

वो भी एक उदास रात थी

मगर चांदनी उस दिन साथ थी

आज भी फिर एक रात है

और आज की चांदनी में

ठंडक भरा सर्द एहसास है

उम्मीद का सवेरा होने को आतुर है

हौसलों की पतवार बस अपने

चरम पर पहुंचने ही वाली है

टिक टिक टिक टिक टिक

घड़ी बीत रही है पल पल

शायद यही वज़ह है कि

मन मेरा व्याकुल है….

सब ठीक हो जाएगा यही

दिल को समझाते है

हम दुनियाँ को समझा आते है

बस एक दिल ही है जिसको

हम कुछ समझा नही पाते है…..

आचार्य अमित

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.