#Kavita by Acharya Amit

एक तेरा इश्क़

और उस पर

मेरे दिल का फ़ितूर

कभी सोचा है

गर दोनों मिल जाये तो

क्या हो सकता है

पता चल जाता है

आपकी आँखों से

आप कितना असर रखते है

हमारी बातों पर

तुम्हारा दिल पाक़ न सही

तो न सही लेकिन

तुम्हारी आँखे पाक़ है

बिल्कुल फूलों की

खुशबु की तरह

अब तुम कहोगी दिल

पाक़ क्यों नहीं है

तो इसका ज़वाब है

ईबादत और दुआ दोनों

ही पराई सी होती है

जब तक खुलूसे दिल से न हो

आचार्य अमित

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