#Kavita by Acharya Amit

गीत…

जन्में है जो धरती के बेटे

धरती को अर्पित हो जाते है…

दुनियां बड़ी सितमगर है

वक़्त से पहले ही परिंदे

आशियाना छोड़ उड़ जाते है

क्या कहे क्या न कहे

इन मतलबपरस्तों को कहो हम

जो बात तो करते है दिल की

पर काग़ज़ के नगीनों में बिक जाते है

हंसना सिखाया है जिन्होंने उन्हें

वो उनको रुलाते रहते है

खाना खिलाया जिस घर ने है

नीलाम उसे भी कर जाते है

उस मां की कोख को भी कर सुना

जिसने उन्हें जीवन है दिया

वो बात पुरानी कर उड़ जाते है

टिक-टिक करता समय का पहिया

सबकुछ बहा कर ले जाता है

जो है पुराना वो उसको नया कर

अपने तरीके से लौटाते है

भगवान को बेचने का दम भरकर

वो मुस्कुराकर कहते है हमारा है ईश्वर

नाखुदा बन वो कहे खुदा की

सब कहते है क्या यही है बशर

जिसकी नैमत खुद है जहां में

उसको ज़हमत देता आया

जिसने इसको सबकुछ दिया है

इसने उसी को हरपल भुलाया

सुना था सुनते आए है सदा से

बचपन जवानी और यह बुढापा

सबसे बड़ी लाचारी है

लिहाज़ से टुटे लिहाज़ का नाता

अपने लिए तो सब जीते है आये

जीवन वही जो सबके काम आए

मरकर वही बस अमर हुए है

जिन्होंने अनमोल वचन है कमाएं….

आचार्य अमित

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