#Kavita by Aditya Vikram

इस दीवाली आप ऐसा एक दीपक यूं जलाओ।

घर से पहले,मन में छाए तुम तमस को ही भगाओ।।

 

रुचिर संबंधों के दीपक,नेह को बाती बनाओ।

भाव के घृत से भरे हों,चौक सा निज हिय सजाओ।

जल, क्षितिज,नभ के लिए शुभ दीप मंगल तुम जलाओ।।

इस दिवाली ०

 

देखना,अपना कहीं फिर,आप से न रूठ जाए।

हाथ को कसकर पकड़ लें, फिर कोई न छूट जाए।

दुखद स्मृतियों में जो भटके हुए हैं, पास लाओ।।

इस दिवाली ०

 

सद्वृत्तिओं की दीपमाला से सजे सब मन-सदन हों।

प्रेम की शुभ तूलिका से स्वस्ति का  बस आचमन हो।

शांति,सुख, सौहार्द्र के रंग से रंगोली तुम सजाओ।।

 

इस दीवाली आप ऐसा एक दीपक यूं जलाओ।

घर से पहले,मन में छाए तुम तमस को ही भगाओ।।

 

आदित्य विक्रम

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