#Kavita by Ajay Ahsas

नया साल आ गया।।

 

कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया

कहते हो मुबारक हो नया साल आ गया।

हम हो रहे हैं बूढ़े कदम बढ़ रहे आगे

दीवार से निकली हुई ईटों से यूं झांके

दीवार से जो ईट निकले ईट कम होगी

परिवार से निकला तो सबका आंख नम होगी

ये शब्द नया सुन के आंख लाल आ गया

कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया।।

होंगे वही महीने और आयेंगे वही दिन

दिन भर करेंंगे मेहनत फिर भी चैन लेंगे छीन

ढूढोगे पूरे साल चैन सुख वो कहां है

बस मारपीट दंगे कत्लेआम यहां है

ये दुष्ट सज्जनों का पहने खाल आ  गया

कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया।।

धोखे हुए पुराने नये साल में होंगे

जिनसे किये हो प्रेम अब वो आंसू ही देंगे

कितना किये भरोसा कि इस साल कुछ होगा

ये साल भी गुजरा और हमें दे गया धोखा

करने हमारी भावना के फाल आ गया

कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया।।

धरती चली तो दिन बनें और साल बन गये

दुनिया में फसाने के हमें जाल बन गये

हमसे है छीना सब हम फटेहाल बन गये

चक्कर में उनके पड़कर हम कंगाल बन गये

अब सीख करके तुमसे हमें चाल आ गया

कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया।।

कहते हो उम्र आपकी बढ़़ती है चल रही

लेकिन हरेक पल में यह घटती है चल रही

लगभग समय जीवन का मैने जो भी बिताया

एहसास की कलम से मैने आज लिखाया

चलना है मुझे अब तो मेरा काल आ गया

कहते हो यार तुम कि नया साल आ गया।।

 

– अजय एहसास

सुलेमपुर परसावां

अम्बेडकर नगर (उ०प्र०) मो०- 9889828588

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