#Kavita by Ajay Jaihari Kirtipad

रिश्तों की बात…….

ठहर जाओ कुछ समय

चाय पीकर जाना।

भला इस जमाने में

…. कहता कौन हैं।

पूछो गर किसी से

……..घर का पता।

सुनने में आता है

….अब उस घर में।

रहता कौन है।

…. सब डूबे हुए हैं।

फेसबुक वाट्स अप में

पाई लागूं बाऊजी।

अब कहता कौन है।

और ज्यादा करो।

अगर दखल अंदाजी

……तो कहते हैं।

तू बीच में बोलने वाला

….होता कौन हैं।

और बता दो थोड़ा

जरा सा काम किसी को।

तो जबाव मिलता है।

यहाँ फ्री बैठा कौन है।

मांग लो तनिक

किसी से थोड़ा सा पैसा।

तो बिना ब्याज के

………….. देता कौन है।

और कितना ही करले

सौतेली मां दूसरे के।

बच्चे को प्यार।

….पर उसे अच्छी माँ।

कहता कौन है।

…..और बिखर रहे हैं।

टूटकर आशियाने लोगों के

अब पट्टी के मकानों में।

रहता कौन है।

इस जमाने में चाहते हैं।

सब अपनी उन्नति

दूसरों की प्रगति पर।

खुश होता कौन है।

और उठाओ इतना ही भार।

जितना सम्भल जाये

बेवजह किसी का भार।

कांधों पर ढोता कौन है।

जो न बन सका।

बुढ़ापे का सहारा

उसे बेटा कहता कौन हैं।

मरने के बाद माँ-बाप को

आज के समय में।

मुखाग्नि देता कौन हैं

हो गई हो कोई ऊँच नीच।

तो माफ करना

वरना आज के जमाने में।

अपनों को अपना

………… कहता कौन हैं।

 

कवि अजय जयहरि कीर्तिप्रद

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