#Kavita by Ajay Jaihari Kirtipad

हकीकत———

 

नाटक फिल्मों में

कलाकारों के रोल बदल जाते हैं।

मरने के बाद लोगों के शरीर के

खोल बदल जाते हैं

और जिनका नहीं सकता कुछ भी

बदल

पैसा आने के बाद उन लोगों के

बोल बदल जाते हैं

 

———नाटक फिल्मों में———

 

शादी ब्याह में बजने वाले

ढोल बदल जाते हैं

चौका छक्का लगने पर

एम्पायर के हाथों व अंगुलियों के

रोल बदल जाते हैं

और जिनका नहीं सकता कुछ भी

बदल

खाना खाने बाद उन लोगों के

डील डोल बदल जाते हैं

 

———-नाटक फिल्मों में——–

 

शाम होते होते सब्जियों के

मोल बदल जाते हैं

नतीजे आने के बाद

चुनाव के

एक्जिट पोल बदल जाते हैं

और जिनका नहीं सकता कुछ भी

बदल

कुर्सी पर बैठते ही नेताओं के

बोल बदल जाते हैं

 

———-नाटक फिल्मों में——–

 

 

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